झाँसी-बाबा साहब अम्बेडकर को दिल की गहराइयों से सलाम, सैयद शहनशाह हैदर आब्दी

बाबा साहब अम्बेडकर को दिल की गहराइयों से सलाम।

आज ६ दिसंबर दलितों को दलित भाव से मुक्त कर संगठित रहो ,शिक्षित ,और संघर्ष करो का मन्त्र देने वाले डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का निर्वाण दिवस है |

सत्ता और प्रशासन के संरक्षण में पूर्व नियोजित षड्यंत्र कर इसी दिन बाबरी मस्जिद को ढहाने के कारण कोई इसे शौर्य दिवस के रूप में और कोई इसे शोक दिवस/काला दिवस और अयोध्या में सद्भावना दिवस के रूप में याद किया जा रहा हैं |

“यह संघ परिवार की प्रतीकात्मक राजनीति का एक हिस्सा है। जिसके कई निहितार्थ हैं। जिसमें सबसे पहली घोषणा यह है कि हम देश इस संविधान और न्यायपालिका को नहीं मानते। बाबरी मस्जिद गिराकर हम यह घोषणा खुलेआम कर रहे हैं, जिसे जो करना है करले।”

और हुआ भी वही। आज तक कोई मुजरिम साबित हुआ? किसी को सज़ा मिली? बल्कि सज़ा की जगह सत्ता मिल गई।

अब तो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपराधी घोषित करने के बाद भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

इस दलित शोषित समाज को इस विषय पर भी गंभीर चिंतन करना चाहिए।

डॉ अम्बेडकर के सन्देश से दलितों को उनके जीवन में शिक्षित होने का अर्थ क्या होता हैं , ज़रुर सीखना चाहिए |

डॉ अम्बेडकर ने शिक्षा से अतिदुर्लभ ज्ञान की प्राप्ति की थी | और दलित भाव से मुक्त होकर उन्होंने अपनी योग्यता से देश में शीर्ष स्थान और विश्व में भी विद्वानों में सम्मानीय स्थान प्राप्त किया था |

संगठन समाज को रचनात्मक दिशा देने के लिए निर्मित होते हैं | जो समाज को अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए उपयोग में लाते हैं , वे गिरोहों का निर्माण करते हैं ,और नाम संगठन का देते हैं | डॉ अम्बेडकर ने रचनात्मक दृष्टि से संगठित होने का सन्देश दिया था ,गिरोह निर्माण के लिए नहीं |

संघर्ष मानव मूल्यों के लिए किया जाता हैं |संघर्ष में समूह हित के लिए व्यक्ति स्वार्थ का त्याग किया जाता है| इसी संघर्ष का सन्देश डॉ अम्बेडकर ने दिया था |

हमारी समझ में डॉ अम्बेडकर की दृष्टि से शिक्षित बनो ,संघर्ष करो और संगठित हो ,का पालन दलित समाज नहीं कर रहा हैं | इसीलिए वह दलित भाव से मुक्त नहीं होना चाहता है| या वोटों की सियासत उसे ऐसा करने नहीं देती। उसके साथ भेदभाव आज भी किया जा रहा है |

आदरणीय श्री नरोत्तम स्वामी बाबू जी की बात से सहमत होते हूऐ, उन्हीं के शब्दों में,”६ दिसंबर का स्मरण जो लोग बाबरी मसजिद ढहाने के लिए शौर्य दिवस और शोक दिवस के रूप में मना रहे हैं ,उनकी बात वो जानें | मुझे तो यह दिवस आपराधिक हुडदंग दिवस और भगवान् राम को टेंट में बिठाने के दिवस के रूप में स्मरण होता हैं |”

बाबा साहब के आदर्श और शिक्षाऐं न सिर्फ दलित शोषित समाज के लिये ब्लकि सर्वसमाज के लिऐ आज भी प्रासंगिक हैं। देश और समाज हित में हमें इसपर अमल करना चाहिए।

“शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो।”

बाबा साहब को शत् शत् नमन।

सैयद शहनशाह हैदर आब्दी
समाजवादी चिंतक – झांसी।

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