जालौन- सीता की खोज में राम ने जला दी लंका रिपोर्ट अतुल पांडेय

जालौन 5 अक्टूबर । रामलीला भवन में चल रहे 171 वे श्रीराम लीला महोत्सव के 12 दिन ‘सीता की खोज’ तथा ‘लंका दहन’ की लीला का मंचन किया गया। जिसमें ‘मेघनाद’ तथा ‘हनुमान’ के बीच हुए संवाद को उपस्थित दर्शकों ने जमकर सराहा।

नगर में रामलीला भवन पर चल रहे रामलीला महोत्सव के मंचन में लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। जिसके प्रथम दृश्य में हनुमान जी लंका में सीताजी की खोज करने जाते हैं। वहां पर अशोक वाटिका में बैठी माता सीता को राक्षसियों द्वारा परेशान करने तथा उन्हें तरह-तरह की यातनायें दिए जाने का दृश्य हनुमान जी ने देखा। तभी, कुछ क्षण बीतने के बाद हनुमान ने प्रभु श्रीराम द्वारा दी गई मुद्रिका को माता सीता के सामने जमीन पर डालकर उन्हे अपना परिचय दिया। इसके बाद अशोक वाटिका में मां सीता की आज्ञा लेकर वह फल खाने के लिए चले गए। जहां पर उन्होंने कुछ फल तोड़े तो कुछ वृक्षों को भी तोड़ा। उनको रोकने के लिए अशोक वाटिका के पहरेदारों ने प्रयास किया। लेकिन, हनुमानजी को वह रोक नहीं सके। तब इसकी सूचना रावण को दी गई। जिस पर रावण ने अपनी सेना के साथ पुत्र अक्षय कुमार को हनुमानजी को रोकने के लिए भेजा। हनुमानजी ने रावण के पुत्र को मारकर पूरी सेना परास्त कर दी। इसकी सूचना जैसे ही रावण को मिली तो उसने क्रोध में आते हुए मेघनाथ को हनुमानजी को पकड़कर उसके समक्ष लाने का आदेश दिया। इसके उपरांत हनुमान को पकड़ने के लिए गए मेघनाथ तथा हनुमान के बीच हुए संवाद की उपस्थित दर्शकों ने काफी सराहना की।अंत में मेघनाथ, हनुमान जी को ब्रह्मास्त्र में बांधकर अपने पिता रावण के पास ले जाता है। जहां पर हनुमानजी की उद्दंडता पर सभी उनकी पूंछ में आग लगाए जाने का सुझाव देते हैं। जिसके बाद सभी राक्षस मिलकर हनुमानजी की पूंछ में आग लगा देते हैं। पूंछ में आग लगते ही हनुमानजी ने उसी समय लघु रूप धारण कर लिया। और लंका के घरों में कूद-कूदकर लंका के सभी महलों में आग लगा दी। रामलीला में राम की भूमिका गोविन्द बाजपेयी , लक्ष्मण की भूमिका में पंकज अग्निहो, हनुमानजी की सुंदर भूमिका रविन्द्र शुक्ला, रावण श्याम शरण , सीता बृजेश शर्मा , सुग्रीव की भूमिका में पं. रमेशचंद्र दुबे सिकरीराजा, सुग्रीव रमेश, सुरसा राम प्रकाश व लंकनी के रूप में सुभाष ने अपनी-अपनी कला का जौहर दिखाते हुए बैठे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लीला का संचालन पवन चतुर्वेदी ने किया तथा व्यास व हरमोनियम वादक के रूप में केशव पांडेय, ढोलक पर राघवेंद्र मिझोना, कांगों पर चंद्र पाल संगत दे रहे हैं।

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