शुभ और सुंदर ज़िन्दगी देती है नवरात्रि, लेखक-शहंशाह हैदर आब्दी

शुभ और सुंदर ज़िन्दगी देती है नवरात्रि!

क्या हम इसका अनुसरण करते हैं?

नव दुर्गा उत्सव, नवरात्र की अपनी अलग महत्ता है। शक्ति की परम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु सम्पूर्ण हिन्दुस्तान में नवरात्रि का पवित्र पर्व एक साल में दो बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तथा अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को बड़े श्रद्धा, भक्ति, हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जिसे शरदीय नवरात्रि व ग्रीष्मकालीन नवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

नवरात्रि में नव कन्याओं का पूजन कर उन्हें श्रद्धा विश्वास के साथ सामर्थ्यानुसार भोजन व दक्षिणा देना अत्यंत शुभ व श्रेष्ठ माना गया है।

इस कलिकाल में सर्वबाधाओं, विघ्नों से मुक्त हो सुखद जीवन के पथ अग्रसर होने का सबसे सरल उपाय शक्ति रूपा जगदम्बा का नवरात्रि में विधि-विधान द्वारा पूजा अर्चना ही एक साधन है। जो इंसानी ज़िंदगी को ख़तरनाक तकलीफों, बीमारियों, ग़मों, दरिद्रता से उबार, ख़ुशियों की नई रोशनी के साथ मनोवांछित फलों की दात्री है।

हिन्दुस्तान में जहां मातृ शक्ति के लिए इस विशेष पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कन्याओं को गर्भ में ही मार देते हैं। यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि जिस देश में कन्या-पूजन का विधान शास्त्रों में है, वहीं कन्याभ्रूण हत्या के मामले सामने आते हैं। यह त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि मातृशक्ति हमारे जीवन में कितना महत्व रखती हैं।

अगर हमने कन्या भ्रूण हत्या पर जल्द ही काबू नहीं पाया तो मुमकिन है देश में लिंगानुपात और तेज़ी से घटे और एक दिन सामाजिक संतुलन भी ऐसा बिगड़े कि संभालना मुश्किल हो जाये।

कन्या, भ्रूण हत्या से बच भी गई तो जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखते ही शुरू होता है उसकी ज़िदंगी का सौदा। जहां उसे अपने तन और मन के साथ ढेर सारा धन भी उस परिवार और पति को सौंपना होता है जहां वो लक्ष्मी बन कर आती है। फिर भी अक्सर ज़ुल्म सहती है और जलाई जाती है। आज के आधुनिक दौर में स्वालम्बी लड़कियां भी इस ज़ुल्म और शोषण का शिकार बन रही हैं।

जिस मातृशक्ति की पूजा, दहेज की बेदी पर उसी की बलि, उसी पर अत्याचार, उसी का शोषण, उसी का बलात्कार और फिर उसकी हत्या भी। कैसी विडम्बना है?

कभी सोचा हमने?

नवरात्रि मनाना तभी सार्थक होगा जब हम अपने समाज की इन कुरीतियों को समाप्त कर मातृशक्ति को सही सम्मान और बराबरी का दर्जा देंगे।

क्या हम इसके लिये तैयार हैं?

सम्पूर्ण ब्रह्मांड सूर्य, ग्रह, नक्षत्र, जल, अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी, पेड़-पौधें, पर्वत, सागर, पशु-पक्षी, देव, दनुज, मनुज, नाग, किंन्नर, गधर्व, सदैव प्राण शक्ति व रक्षा शक्ति की इच्छा से चलायमान हैं।

मानव सभ्यता का उदय भी शक्ति की इच्छा से हुआ। उसे कहीं न कहीं प्राण व रक्षा शक्ति के अस्तित्व का एहसास होता रहा है। जब महिषासुरादि दैत्यों के अत्याचार से भू व देव लोक व्याकुल हो उठे तो परम पिता परमेश्वर ने आदि शक्ति मां जगदम्बा को विश्व कल्याण के लिए प्रेरित किया। जिन्होंने महिषासुरादि दैत्यों का वध कर भू व देव लोक में पुन: प्राण शक्ति व रक्षा शक्ति का संचार कर दिया।

बिना शक्ति की इच्छा एक कण भी नहीं हिल सकता। त्रैलोक्य दृष्टा शिव भी इस (शक्ति) की मात्रा, के हटते ही शव (मुर्दा) बन जाते हैं। अर्थात्‌ देवी भागवत, सूर्य पुराण, शिव पुराण, भागवत पुराण, मार्केंडेय आदि पुराणों में शिव व शक्ति की कल्याणकारी कथाओं का अद्वितीय वर्णन है।

भगवान श्रीराम ने भी आदि शक्ति जगदम्बा की आराधना नवरात्रि के विशेष पर्व में कर भगवती की अद्वितीय कृपा प्राप्त कर अत्याचारी रावण का वध किया था।

नव दुर्गा उत्सव, नवरात्रि में श्रद्धा एवं विश्वास के साथ दुर्गा सप्तशती के श्लोकों द्वारा मां-दुर्गा देवी की पूजा नियमित शुद्वता व पवित्रता से की जाए तो निश्चित रूप से मां प्रसन्न हो इष्ट फल प्रदान करती हैं।

इसी तरह दुर्गा कवच, अर्गला, कीलक, रात्रिसूक्त, देवी सूक्त, अपराध क्षमा-प्रार्थना, अपराध क्षमा-स्त्रोत ऐसे हैं। जिन्हें किसी भी स्थान, देशकाल व परिस्थिति में करके भी मनोवांछित फल अधिक शीघ्रता से प्राप्त किया जा सकता है।

अंधेरे, ग़म और डर में खोए हुए इंसान को ज्योति शक्ति के रूप में सदैव सहायता करती है। ज्योति शब्द का अर्थ प्रकाश या रोशनी से है जिसके बिना ज़िंदगी का संचालन नामुमकिन भी है।

इसलिए नवरात्रि में अखंड ज्योति का विशेष महत्व है, जो जीवन के हर रास्ते को सुखद प्रकाशमय बना जाती है। इसलिए जहां तक संभव हो अखंड ज्योति का प्रज्ज्वलन विधिवत संकल्प के साथ प्रत्येक घर में होना चाहिए। जिसके प्रत्यक्ष प्रभाव से सारी विघ्न बाधाएं, कष्ट परेशानियां, बीमारियां इत्यादि समाप्त हो जाती हैं।

संक्षिप्त में, अश्विन शारदीय महानवरात्र पर मां शैलपुत्री, ब्रहमाचारिणी, चन्द्र घेटा, कुष्मोडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिध्दिरात्रि मां के नौ अलग अलग रूपों सादर नमन करते हुऐ, हमारा नवरात्रि मनाना तभी सार्थक है जब हम महिला शक्ति को ह्र्दय से प्यार और सम्मान दें।

सभी देशवासियों को नव दुर्गा उत्सव,
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। नवरात्रि सब के किये मंगलमय हो।

ईश्वर-अल्लाह, हम सब को देश और समाज के उत्थान के लिए बिना किसी भेद भाव के कार्य करने की दृढ इच्छा शक्ति दे।

झूठे, मक्कारों, भगवान, देश और उसके संविधान, संसद, एकता परिषद, न्यायपालिका और समाज के साथ विश्वासघात करने वालों, कथनी करनी में अंतर रखने वालों, शेर की खाल में भेड़ियों, भ्रष्टाचारियों, बलात्कारियों और नफरत की सियासत करने वालों से देश और समाज की रक्षा करने की हिम्मत दे। आमीन।

पुन: नव दुर्गा उत्सव, नवरात्रि की दिली मुबारक बाद।

(सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी)
समाजवादी चिंतक
बाह्य अभियंता
(बाह्य अभियांत्रिकी सेवाऐं)
भेल-झांसी (उ0प्र0), पिन—-284129,

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