झाँसी की बिजली-फाल्ट का पता नहीं, फोन उठ नहीं रहे, जनता को तड़पने दो, रिपोर्ट-देवेंद्र

झाँसी। एक तरफ मौसम की मार, दूसरी ओर बिजली बेकार। सबसे ज्यादा कोई परेशान हो रहा है , तो वह है जनता । जनता की सुनने वाले नगर में पिछले कई दिनों से लापता है । किसी को यह नहीं पता कि फॉल्ट कहां है , समस्या क्या है? निदान कैसे होगा?

विभाग के फोन नहीं उठ रहे हैं। कोई जनप्रतिनिधि दुख दर्द समझने को तैयार नहीं । विपक्षियों को ऐसा करंट लगा कि वह सदमे में है। इन हालातों में रामराज का सपना देख रही जनता सरकार को कोस रही है।

नगर में पिछले एक हप्ते से ज्यादा समय से बिजली की आंख मिचौली चल रही है। कटौती का कोई समय निर्धारित नहीं है । विभाग करंट की तरह लापता है।

भले ही सावन का महीना चल रहा हो, लेकिन इंद्रदेव मेहरबान नहीं हो रहे हैं । शायद इंद्र देव की नाराजगी को विद्युत विभाग ने अपनी तीसरी आंख से भांप लिया है और जनता को जले में नमक छिड़कने की तरह कटौती का झटका दे रही है ।

बिजली के अचानक गुल होने और कई घंटों तक गायब रहने को लेकर जब जनता सवाल करती है , तो उसे कोई उत्तर देने वाला नजर नहीं आता है । चुनाव में 24 घंटे सेवा करने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि अपनी कामयाबी को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में कोई कोताही नहीं दिखाते हैं, लेकिन बिजली से तड़प रहे लोगों की परेशानी किसी भी जनप्रतिनिधि को नजर नहीं आ रही है।

सदर विधायक रवि शर्मा , सांसद अनुराग शर्मा को नगर में हो रही विद्युत कटौती की जानकारी ना हो , ऐसा संभव नहीं है, लेकिन इन प्रतिनिधियों की ओर से ऐसी कोई पहल नहीं की गई , जिसमें जनता को इस बात से राहत मिल सके कि उनके माननीय जनता के निकल रहे पसीने को पूछने के लिए विभाग से हवा के बहाव को कायम रखने के लिए करंट सुचारू करा देंगे।

भारतीय जनता पार्टी के नेता सदस्यता अभियान में हर गली कूचे से लेकर दुकानदारों से संपर्क कर रहे हैं लेकिन उन्हें इस बात का दिलासा नहीं दे पा रहे कि हम बिजली कटौती को कितने समय में रोक देंगे या इसके लिए प्रयास कर रहे हैं इन नेताओं का कोई तर्क भी सामने नहीं आता इससे जनता समझ नहीं पा रही कि शिकायत के लिए क्या सत्ताधारी दल में सिर्फ माननीय ही मान्य होते हैं?

करंट के गायब होने से ज्यादा आश्चर्य इस बात का है कि विपक्षी नेताओं को भी इस मुद्दे के लिए जनता को तलाशना पड़ रहा है । विपक्ष आवाज उठाने में भी आगे नहीं आ पा रहा । इसके पीछे जनता कारण जानना चाहती है , लेकिन विपक्षी दलों के नेता कहीं गायब हैं।

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