R.s.s. ने राष्ट्रवाद से किनारा कर राष्ट्रीयता को अपनी पहचान बताया

नई दिल्ली 3 जुलाई देश में राष्ट्रवाद को लेकर चली लहर के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर भी यही जन धारणा है कि यह राष्ट्रवाद के दर्शन पर आधारित संगठन है, लेकिन ऐसा नहीं है । आर एस एस में साफ कर दिया है कि वह राष्ट्रवादी कतई नहीं है । बल्कि राष्ट्रीय है । संघ ने अपने समर्थकों से भी राष्ट्रवाद सब से बचने की सलाह दी है।

उन्होंने खुद को राष्ट्रीय कहने की अपील की है । संघ का मानना है कि उसके समर्थक भी राष्ट्रवाद को लेकर भ्रांतियों के शिकार हैं । हकीकत यह है कि यह शब्द पश्चिम से आया है । संघ के मनमोहन वैद्य का मानना है कि संघ विचारधारा के समर्थक 4 शब्दों- राष्ट्र, राष्ट्रतव राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय के जरिए ही अपनी पूरी बात कह सकते हैं।

विद्रोह दिल्ली में इंद्रप्रस्थ संवाद केंद्र की ओर से आयोजित नारद जयंती समारोह में संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने साफ किया कि संघ राष्ट्रवाद में नहीं, राष्ट्रीयता में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि भारत में राष्ट्रवाद नहीं रहा है देश में जिस राष्ट्रवाद की चर्चा होती है , वह तो भारत का है ही नहीं। बल्कि राष्ट्रवाद तो पश्चिमी देशों से आया है। पश्चिम में जिस नेशनलिज्म के नाम पर कई राज्यों में अपने विस्तार के लिए दूसरे राष्ट्रों पर युद्ध थोपे,हिंसा और अत्याचार किए, वह नेशनलिज्म तो वहां का है

आर एस एस की इस बात को लेकर आज तक न्यूज़ पोर्टल में भी खबर प्रकाशित हुई है।

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