पहले चरण में कम वोटिंग प्रतिशत क्या सत्ताधारी बीजेपी के लिए घातक साबित होगी?

नई दिल्ली 12 अप्रैल । गुरुवार को पहले चरण की वोटिंग में 60 प्रतिशत लोगों ने अपने मतदान का प्रयोग किया । 20 राज्यों की 91 सीटों पर हुए मतदान की तुलना यदि 2014 के चुनाव से की जाए तो यह करीब 6:30 प्रतिशत कम है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि इस कम प्रतिशत का असर सत्ताधारी दल पर पड़ेगा या विपक्ष इस की मार झेलेगा?

पहले चरण की 91 सीटों पर गुरुवार को वोट पड़े हैं ,वहां कुल 1239 उम्मीदवार मैदान में हैं । इन सभी उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया है । 23 मई को नतीजे सामने आएंगे । आपको बता दें कि पहले चरण में सबसे ज्यादा 81 प्रतिशत पश्चिम बंगाल में जबकि सबसे कम बिहार में 50% रहा। उत्तर प्रदेश की 8 सीटों पर हुए चुनाव में 64% मतदान हुआ।

आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 32 सीटें जीतने में सफल रही थी जबकि कांग्रेस के पास 7 सीटें रही थी इसके अलावा 16 सीटें टीडीपी के पास 11 टीआरएस 9 सीटें वाईएसआर कांग्रेस और चार सीटें बीजेडी, जबकि 12 सीटें अन्य दलों ने जीती थी।

पहले चरण के चुनाव में वोटिंग प्रतिशत कम होने के बाद राजनीतिक दल सतर्क हो गए हैं । राजनीतिक जानकार मान रहे हैं वोटिंग प्रतिशत के कम होने का असर पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए ही घातक साबित हो सकता है।

इसलिए सभी दलों में दूसरे चरण के चुनाव में वोटिंग प्रतिशत को बढ़ाने की जुगाड़ लगाना शुरू कर दी है । कोशिश की जा रही है कि अधिक से अधिक संख्या में मतदाता मतदान के लिए आए । राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि मतदाताओं का रुझान मौसम और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते कमजोर है, शायद इसलिए वोटिंग का प्रतिशत गिर गया।

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