राजनीति में आने के ऐसे संकेत दिए थे अनुराग ने, कोई समझ नहीं पाया उनकी रणनीति, रिपोर्ट-देवेंद्र, रोहित, सत्येंद्र

झाँसी। राजनीति को अपने पिता से सीखने वाले अनुराग शर्मा ने बहुत पहले राजनीति में आने के संकेत दिए थे, लेकिन कोई उनकी रणनीति को समझ नहीं पाया । जब वह बीजेपी से प्रत्याशी बने, तो सभी को चकित रह गए।

बैजनाथ ग्रुप के चेयरमैन अनुराग शर्मा अपने पिता विश्वनाथ शर्मा से राजनीति का हर वह पहलू संस्था को संचालित करने के दौरान समझते रहे थे, जिसमें गोपनीयता अहम हथियार होता है। अनुराग शर्मा ने अपने को स्थापित करने के बाद राजनीति में मुकाम हासिल करने के लिए बीते कुछ सालों में अपनी छवि में एक जबरदस्त बदलाव किया था। हालांकि उनका यह बदलाव कोई समझ नहीं पाया।

दरअसल बेहद शांत स्वभाव के अनुराग शर्मा को लेकर बहुत ही कम लोगों ने यह कल्पना की होगी कि वह राजनीति में भी दस्तक दे सकते हैं । बैद्यनाथ ग्रुप के संचालन में व्यस्त रहने वाले अनुराग शर्मा यदा कदा ही सार्वजनिक जीवन में नजर आया करते थे , लेकिन पिता की विरासत में मिली राजनीतिक पृष्ठभूमि में वो समाज और देश के लिए कुछ करने की अपनी जिज्ञासा को अंदर ही अंदर दबाए रखा था।

अनुराग शर्मा से जुड़े बेहद नजदीकी लोगों का कहना है कि अनुराग बैद्यनाथ जैसे बड़े फर्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में अपनी प्रतिभा का जो लोहा मनवा रहे थे, उसमें कहीं ना कहीं उनके अंदर समाज में अपनी स्वीकारता दर्शाने का भाव भी छुपा था ।

अनुराग ने यह भाव जब प्रदर्शित करने का मन बनाया, तो वह सार्वजनिक जीवन में बेहद खुले तौर पर आने को तैयार हो गए। इसके संकेत उन्होंने बीते कुछ सालों में विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्यों , खेल की गतिविधियों और प्रशासनिक बैठकों में हिस्सा लेकर दर्शाए भी थे।

उस दौरान लोगों को यह समझ नहीं आया कि अनुराग शर्मा सार्वजनिक जीवन में इतनी सहज तरीके से लोगों से संवाद भी करते हैं इस दौरान अनुराग शर्मा ने राजनैतिक क्षेत्र में पदार्पण के लिए पार्टी के चयन को लेकर मंथन भी किया। क्योंकि पिताजी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे इसलिए अनुराग ने भी भाजपा को ही अपने राजनीतिक केरियर के लिए श्रेष्ठ माना।

जानकार बताते हैं कि बीते कुछ दिनों में अनुराग शर्मा ने दिल्ली , नागपुर अन्य बड़े शहरों में बड़े नेताओं के बीच अपने बैठकों का सिलसिला शुरू किया और राजनैतिक शुरुआत के लिए उपयुक्त माहौल की तलाश जारी रखी।

जब झांसी सीट से उमा भारती ने चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया तो अनुराग शर्मा ने टिकट के लिए अपनी दावेदारी को पेश किया।। यह बात दीगर है कि उनकी दावेदारी बेहद गोपनीय और बड़े स्तर पर रही जिसने सार्वजनिक होने पर सभी को सकते में डाल दिया था । जानकार बताते हैं कि अनुराग शर्मा एक कुशल प्रशासक होने के सभी गुण अपने अंदर रखते हैं , जिसमें जनता से संवाद और उनकी समस्याओं को समझने का माद्दा शामिल है।

यही कारण है कि जब टिकट के लिए अन्य दावेदारों में अनुराग शर्मा का नाम शामिल हुआ, तब उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और सन्चालन की कुशल क्षमता ने उन्हें दूसरे दावेदारों में श्रेष्ठ साबित करने में अहम भूमिका निभाई।

प्रत्याशी घोषित होने के बाद अनुराग शर्मा ने साफ संकेत दिए कि वे बुंदेली लोगों के मूलभूत समस्याओं को बेहद नजदीक से समझते हैं इसके लिए उन्होंने कई योजनाएं भी तैयार की हैं।

बरहाल, सबको अपनी दावेदारी से चौकानेवाले अनुराग शर्मा अपनी सहजता से लोगों के दिलों में किस तरह से उतरते हैं , यह एक बड़ा सवाल है , जो आने वाले समय में उनकी जीत में अहम भूमिका निभाएगा।

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