झाँसी-अनुराग पर ‘कुछ’ बे-राग, महापौर ने फिर दिखाया अलग अंदाज, रिपोर्ट-देवेंद्र, रोहित,सत्येंद्र

झाँसी। सबका साथ सबका विकास । भाजपा का यह मूल मंत्र हर कार्यकर्ता के दिल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ इस तरह उतारा है कि पार्टी निर्णय पर सवाल उठाने वालों को संभालने के लिए वरिष्ठ नेताओं के बोल उन्हें रास्ते पर लाने का काम करते हैं। इसका उदाहरण झांसी ललितपुर संसदीय सीट पर प्रत्याशी बनाए गए अनुराग शर्मा के मामले में देखने को मिल रहा है।

पिछले कई दिनों से झांसी ललितपुर संसदीय सीट पर पार्टी की ओर से प्रत्याशी की घोषणा में हुई देरी के बाद दावेदारों के समर्थकों में बेचैनी और जिज्ञासा ने उन्हें विचलित अवस्था में ला दिया था।

कल जब दोपहर पार्टी की ओर से अनुराग शर्मा के नाम पर मुहर लगाई गई, तो दूसरे दावेदारों के समर्थक अपनी भावनाओं को आक्रोष में उस दूरी तक ले गए जहाँ विपक्ष ने इसे पार्टी निर्णय के खिलाफ ‘असंतोष’ का नाम दे दिया।

सोशल मीडिया पर भी पार्टी प्रत्याशी को लेकर अपनों ने ही जब सवाल उठाए तो हड़कंप मचना शुरू हो गया । संचार क्रांति के इस युग में अपनी बात तरीके से ना रख पाना पार्टी, संगठन या संस्था के निर्णय को सवालों में खड़ा कर देता है।

ऐसी ही कुछ सवाल जब भारतीय जनता पार्टी के अपनों ने अनुराग शर्मा को लेकर उठाए, तो महापौर रामतीर्थ सिंघल ने बड़े सटीक अंदाज में कहा कि संगठन में पार्टी के निर्णय की समीक्षा या इसके विपरीत टिप्पणी भी करने का मुझे अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि पार्टी के निर्णय को सही साबित किया जाए। बड़े ही खूबसूरत अंदाज में अपनी बात को पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने वाले रामतीर्थ सिंघल ने चंद शब्दों में कार्यकर्ताओं को नसीहत भी दी और जोश को वापस जीत के लिए समेटने का आव्हान किया।

माना जा रहा है कि चंद कार्यकर्ताओं की नाराजगी महापौर रामतीर्थ सिंघल के कर्तव्य परायणता की नसीहत के आगे शायद ही टिक सके और एकजुटता का माहौल बना दे। महापौर ने अपनी बात को सोशल मीडिया के जरिए भी कार्यकर्ताओं के बीच बहुत कम शब्दों में पहुंचाया है।

आपको बता दें कि संसदीय सीट के लिए जो दावेदार मैदान में थे । उन से हटकर अनुराग शर्मा को टिकट दिए जाने के बाद जिन लोगों की नाराजगी संगठन और पार्टी स्तर पर अंदर खाने में किसी तूफान को लाने की आशंकाओं को जता थी , उसे विधायक , महापौर और अन्य बड़े नेताओं ने अपने संगठित करने वाले अंदाज को दिखाकर समाप्त करने की दिशा में पहल तो कर ही दी है।

माना जा रहा है कि महापौर रामतीर्थ का संगठन के प्रति आस्था और निष्ठा का आव्हान , नाराज लोगों को सही समय पर सही रास्ते पर लाने में अहम भूमिका निभाएगा!

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