उमा का नया फंडा-अपना पैसा अपने लोग, पुकार जनता के नाम से, रिपोर्ट-सत्येंद्र

झाँसी। क्षेत्र की जनता करे पुकार उमा भारती फिर एक बार । 2014 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से अबकी बार मोदी सरकार के नारे लगे थे उसी तर्ज पर उमा भारती ने अपने आप को राजनैतिक फंडे में लपेटते हुए अपनों से ही अपनी मांग दोबारा लगवाना शुरू कर दिया है।

झांसी संसदीय क्षेत्र से वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती का राजनीतिक रूप किसी की समझ में नहीं आता है । पल पल में अपने फैसले बदलने वाली उमा भारती ने एक बार फिर से नए राजनीतिक फंडे का प्रयोग करना शुरू कर दिया है।

कुछ दिनों पहले ही भोपाल में उमा भारती ने लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में जब मोदी उमा भारती को लेकर यह कहा कि वह अपने काम के लिए सभी से लड़ जाती हैं, इसके बाद उमा भारती ने अपने फैसले को सार्वजनिक रूप में पलटने की बात नहीं कही, लेकिन पर्दे के पीछे से अपनी डिमांड को जनता के सामने रखना शुरू कर दिया है।

इन दोनों झांसी में कई जगह कुछ पोस्टर लगे नजर आ रहे हैं । कुछ होर्डिंग भी लगी हैं, जिसमें उमा भारती की तस्वीर के साथ यह लिखा गया है कि क्षेत्र की जनता करे पुकार, उमा भारती फिर एक बार।

पोस्टर और होर्डिंग में उमा भारती के विकास कार्यों को दर्शाते हुए निवेदक के रूप में जिन लोगों के नाम लिखे गए हैं, वह उमा भारती के लिए काम करने वाले संगठन है । इसमें एक संगठन डीएनटी के नाम का, जिसका एक पदाधिकारी स्वयं भी टिकट दौड़ में है।

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि सांसद बनने के बाद पिछले 5 साल में जिस तरह से उमा भारती ने अपने क्षेत्र की जनता को नजर अंदाज किया और इसके लिए उन्होंने एक सभा में यह स्वीकार भी किया कि मैं सबसे निकम्मी सांसद हूं।

उमा भारती को लग रहा है 2019 के चुनाव में 2014 की तरह मोदी सरकार की लहर चल सकती है । ऐसे में संसदीय चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो उनके लिए घाटे का सौदा हो सकता है।

यही कारण है कि वह डिफेंस कॉरिडोर, प्रोसेसिंग पार्क जैसे कार्यों को गिनाने के साथ अपनी डिमांड के लिए हर हथकंडे अपना रही हैं । कभी वह गाय को भोजन कराती नजर आ जाती है, तो कभी बच्चों के साथ खेलते हुए ।

कभी कार्यक्रम में जाने के लिए टैक्सी में सवार होकर निकलती है, तो मंच से यह कहती है कि वह निकम्मी सांसद हैं । राजनीतिक जानकार रहते हैं उनका यह कदम यह दर्शाता है कि वो पब्लिक की सहानुभूति बटोरने के लिए सब कर रही है।

अब देखना यह है कि क्या उमा भारती वाकई चुनाव लड़ती है या यह उनका राजनीतिक फंडा है, जिसे वह किसी दूसरे मकसद के लिए प्रयोग कर रही हैं!

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