झाँसी-गहरा है उमा भारती की चुप्पी का राज, पीएम की रैली में कर सकती है बड़ा धमाका!

झांसी 10 फरवरी । क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती की खामोशी उनके एक सफल राजनेता के गहरे व्यक्तित्व को दर्शा रही हैं । वह खामोश होकर भी अपनी राजनीतिक धार को कम नहीं होने दे रही हैं ।

जानकार मान रही हैं कि बुंदेलखंड राज्य पर उमा भारती की खामोशी किसी बड़े तूफान का संकेत है। बहुत मुमकिन है कि 15 फरवरी को होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में उमा भारती की चुप्पी किसी बड़े धमाके के रूप में सामने आए।

बीते रोज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 फरवरी को भोजला मंडी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली का स्थलीय निरीक्षण किया योगी ने इस स्थान पर मंडलीय समीक्षा बैठक भी की। योगी के साथ केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी मौजूद रही थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस यात्रा में सबसे अहम बात यह रही कि पूरे समय केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कुछ भी नहीं बोला । जब मीडिया से बात कर रही थी तब उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा और ममता बनर्जी पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया, लेकिन बुंदेलखंड राज्य के मामले पर चुप्पी साध ली ।

अपने पुराने बयान को लेकर भी उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की । बस इतना कहा कि वह पृथक राज्य के लिए किए जा रहे इस आंदोलन को कोई क्षति नहीं पहुंचाना चाहती हैं यदि गौर करें तो उमा भारती ने अपने शब्दों में बहुत कुछ कह दिया है

जानकार मानते हैं कि उमा भारती इस समय बहुत असमंजस की स्थिति में है । वह झांसी संसदीय सीट को छोड़ना भी नहीं चाहती हैं और वर्तमान हालातों उपज रहे असंतोष को समझती भी हैं । ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर है ।
पिछले लोकसभा चुनाव में उमा भारती ने बुंदेलखंड राज्य बनाने के लिए 3 साल का वादा किया था । ये वादा अब उनके गले की फांस बन गया है।

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि उमा भारती अपनी चुप्पी में बुंदेलखंड राज्य की आंदोलन को समाए हुए हैं । वो अंदर ही अंदर यह स्वीकारती है कि प्रत्येक बुंदेलखंड राज्य का आंदोलन उनकी किसी भी बात से नुकसान की स्थिति में आ सकता है ।

ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि उमा भारती क्या अपने मन में चल रहे किसी प्लान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान सार्वजनिक मंच से बताने की तैयारी में है?

सन 2019 का आम चुनाव जहां भाजपा के लिए बेहद अहम है वहीं केंद्रीय मंत्री उमा भारती के लिए भी करो या मरो स्थिति का है। राजनीति में किसी भी नेता के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण उसका निर्वाचन क्षेत्र होता है । उमा भारती झांसी निर्वाचन क्षेत्र को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए एक तरफ जहां सुरक्षित मानती हैं तो वहीं अपने कार्यकाल में उपजे असंतोष को भी समझती हैं ।

पार्टी स्तर पर लगभग हाशिए पर चल रही उमा भारती इन दिनों अपने राजनीतिक कैरियर में कई मुद्दों पर कहा जाए कि अकेले ही लड़ रही हैं। पिछले कुछ दिनों में उनके तेवर में काफी बदलाव भी देखने को मिला है।

ऐसी में उमा भारती से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान अपने अंदर चल रहे ज्वालामुखी को बाहर निकालने के साथ ही अपने दिल की बात भी कह सकती हैं । शायद वह इस मंथ से एक तीर से कई निशाने साधने के मूड में हैं

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