महापौर जी! यह आपके झांसी की ही सड़के हैं, क्या इन पर पैदल चलेंगे? रिपोर्ट-देवेंद्र, सत्येंद्र, रोहित

झाँसी। महानगर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले कई दिन बीत गए हैं ।
शासन की ओर से भेजे जा रहे हैं। पैसों के बाद प्रशासनिक स्तर पर स्मार्ट सिटी के लिए कई कार्य कराए जा रहे हैं । इन सबके बीच जिस मार्ग पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक है, उन मार्गों की हालत गांव की गलियों से भी बदतर है।

बुंदेलखंड का झांसी इन दोनों चर्चा में है .इसके कुछ कारण है । एक तो महानगर का स्मार्ट सिटी में शामिल होना । दूसरा पृथक बुंदेलखंड राज्य को लेकर चल रहा आंदोलन।

जब से महानगर स्मार्ट सिटी में शामिल हुआ है। नगर की सूरत बदलने के लिए महापौर और रामतीर्थ सिंगल ने कई दावे किए हैं । इनमें इलाइट से बस स्टैंड, बीकेटी से शिवपुरी रोड, स्टेशन से इलाहाबाद बैंक मार्ग पर चौड़ीकरण से लेकर अन्य विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

लेकिन इन सबके बीच जिन जरूरतों को पूरा किया जाना चाहिए उसे ना तो प्रशासन और ना ही जनप्रतिनिधियों का ध्यान जा रहा है. इसमें सबसे हास्य पद स्थिति यह है कि विपक्ष के लोग भी जनहित के कार्यों को आवाज देने से हिचक रहे हैं।

मामला चाहे सड़क का हो या बेरोजगारों की समस्याओं का। यदि बात नगर की सड़कों की की जाए, तो सबसे ज्यादा खराब हालत सिपरी बाजार की सड़कों की है ।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बाजार में बन रहे ओवर ब्रिज दोनों ओर के संपर्क मार्ग जर्जर हालत में है। चित्र चौराहे से तांगा स्टैंड तक जाने वाला मार्ग और रस बहार से आवास विकास की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील है ।

इस मार्ग पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक भी है बावजूद इसके इस मार्ग को मरम्मत कराने के लिए ना तो जिलाधिकारी, कमिश्नर और ना ही संगठनों के लोग पहल करने को तैयार हैं।

चित्र में आप देख सकते हैं कि चित्र चौराहे से तांगा स्टैंड की ओर जा रहे मार्ग में बीती रात हुई हल्की बारिश में किस कदर तबाही मचा दी है । यहां से वाहन चालकों का निकलने में पूरी तरह से दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है, लेकिन उनकी मजबूरी है कि उन्हें इस मार्ग से ही निकलना है।

लोगों का कहना है कि प्रशासन स्मार्ट सिटी के लिए सड़कें नालियां और रंग रोशन पर लाखों रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन सीपरी बाजार के ओवर ब्रिज के दोनों ओर बने संपर्क मार्ग पर मिट्टी डालने में भी परेशानी हो रही है । क्या यह उचित है ? आखिर जनता कब तक इन टूटे फूटे मार्गों पर चलने को मजबूर रहेगी?

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