योगी सरकार 1984 में कानपुर में हुए सिख दंगों की जांच कराएगी, एसआईटी बनी, रिपोर्ट-रिंकू

लखनऊ 6 फरवरी। अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख दंगों की जांच के लिए 4 सदस्यों का विशेष दल गठित कर रही है।

पूर्व पुलिस महानिदेशक अतुल के नेतृत्व वाली एसआईटी को पुराने मामलों की जांच सौंपी गई है । इन मामलों में शुरुआती जांच के बाद आरोपियों को मुक्त कर दिया गया था और पुलिस द्वारा अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी।

पूर्व डीजीपी के अतिरिक्त एसआईटी के अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश सुभाष चंद्र अग्रवाल, योगेश्वर कृष्ण है । कानपुर के पुलिस प्रमुख इसके सदस्य सचिव होंगे

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी राज्य सरकार को 6 महीने में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी । मनजीत सिंह व अन्य द्वारा दायर एक याचिका के आधार पर शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को एसआईटी गठित करने को कहा है।

बताया जाता है कि एसआईटी पहले उस अवधि के दौरान किए गए जघनय अपराधों की जांच करेगी । इसके बाद जरूरत हुई तो आगे की जांच सीआरपीसी की धारा 173 8 के तहत की जाएगी।

एक अधिकारी ने कहा कि 1984 के दंगों के दौरान बहुत से सिखों की सड़कों पर नृशंस हत्या कर दी गई थी और बहुत से मामले नजीराबाद व बजारिया व अन्य पुलिस थानों में दर्ज हैं.

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