मायावती को यादव से ज्यादा दलित और मुस्लिम वोटों पर भरोसा, गठबंधन के जातीय समीकरण फिट किए

लखनऊ 17 जनवरी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर हुआ गठबंधन सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दे चुका है । जानकार बता रहे हैं कि मायावती ने गठबंधन में उन सीटों को वरीयता दी है, जहां दलित और मुस्लिम जाति समीकरण उनके पक्ष में ज्यादा नजर आ रहे हैं।

पश्चिमी यूपी में बहुजन समाज पार्टी मजबूत स्थिति मानी जाती है यही कारण है कि इस इलाके में बहुजन समाज पार्टी ने करीब 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का गठबंधन में फैसला लिया है।

सूत्रों के मुताबिक पश्चिमी यूपी की 11 सीटों पर बसपा, 8 सीटों पर सपा, 3 सीटों पर आरएलडी चुनावी मैदान में उतरेगी।

जानकार बताते हैं कि पश्चिमी यूपी के नोएडा गाजियाबाद मेरठ बुलंदशहर आगरा फतेहपुर सीकरी सहारनपुर अमरोहा बिजनौर नगीना और अलीगढ़ सीटें बसपा के खाते में हैं।

वर्तमान में इन सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। समाजवादी पार्टी हाथरस मुरादाबाद संभल कैराना रामपुर मैनपुरी फिरोजाबाद और एटा लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी। आरएलडी को बागपत मथुरा और मुजफ्फरनगर सीट दी जाएगी।

दरअसल मायावती पश्चिमी यूपी में दलित मुस्लिम जाट मतदाता की संख्या को अच्छी तरह से जानती हैं। पश्चिम यूपी में करीब एक दर्जन सीट है जहां 30 फीट से ज्यादा मुस्लिम मतदाता है । सहारनपुर में 39 कैराना में 39 मुजफ्फरनगर में 37 बिजनौर में 38 मुरादाबाद में 45 अमरोहा 37 रामपुर 49 मेरठ में 31 नगीना में 42 और बागपत में 17 फीसद मुस्लिम मतदाता है

आपको बता दें कि पश्चिम यूपी में मुस्लिम और दलित मतदाता निर्णायक की भूमिका में हैं । ऐसे में पश्चिम यूपी की कई ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां जाट मतदाताओं की अहम भूमिका है । इस तरह से समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और आरएलडी मिलकर इन वोटों को अपने पाले में सहेजने में सफल होते हैं, तो उनकी जीत का रास्ता आसान हो सकता है।

बसपा ने पश्चिम यूपी की उन्ही सीटों को लिया है जो मुस्लिम और दलित बाहुल्य वाली मानी जाती हैं । इससे साफ है कि मायावती यादव वोटों से ज्यादा दलित और मुस्लिम पर भरोसा जता रही हैं।

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