झाँसी में गठबंधन के साथ कद्दावरो के सामने भी कद बचाने की चुनौती! रिपोर्ट-देवेन्द्र, रोहित, बीनू तिवारी

झांसी। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच हुए हुए गठबंधन को लेकर जहां दोनों दलों के सामने अपने अस्तित्व को बचाने की चुनौती की आधार माना जा रहा है, तो वहीं स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के कद्दावर नेताओं के सामने भी अपना कद बचाने की चुनौती है।

बुंदेली माटी में चुनावी गठबंधन का यह पहला मौका नहीं है खासकर समाजवादी पार्टी के लिए पिछले विधानसभा चुनाव में ही समाजवादी पार्टी ने कांग्रेश के साथ गठबंधन कर जनता को जीत के लिए अपने पाले में करने की भरसक कोशिश की थी।

विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था, तब समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव ने पूरे जोश के साथ ऐलान किया था कि अब यह गठबंधन पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा की नींव हिला कर रख देगा। यही बोल फिर से बसपा के साथ हुए गठबंधन के बाद सुनाई देने लगे हैं।

राजनीतिक जानकार राज्यसभा सांसद ही नहीं बल्कि बहुजन समाज पार्टी के नेताओं के बोल को भी अपने स्तर पर आक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि भले ही गठबंधन लोकसभा चुनाव में कुछ भी नतीजा दे, लेकिन इस गठबंधन के साथ प्रदेश में स्थानीय नेताओं के सामने अपना कद बचाने की चुनौती है। गठबंधन में सम्मान और कार्यकर्ताओं को संभालना कठिन काम होता है। चुनाव में किस चेहरे पर भीड़ आएगी और किस चेहरे पर ताकत दिखेगी, यह बड़ा सवाल होता है।

चेहरे के सवाल पर झांसी ललितपुर संसदीय क्षेत्र में वर्तमान परिवेश में समाजवादी पार्टी की ओर से चंद्रपाल सिंह यादव बड़ा चेहरा है, तो पूर्व विधायक दीपनारायण सिंह दूसरी लाइन के बड़े नेता माने जाते हैं । दोनों नेताओं से वर्तमान में एमएलसी प्रतिनिधि आर पी निरंजन पार्टी स्तर पर अपना कद काफी ऊंचा कर चुके है। यही नहीं सपा मुखिया की कृपा से टिकट पा चुके राहुल सक्सेना भी किसी प्रकार से चुनौती देने में कमजोर नहीं है । ऐसे में यहां नेताओं के चेहरों के साथ चुनावी मैनेजमेंट में व्यवस्था को लेकर पेंच भी फसेगा।

बात अकेले समाजवादी पार्टी के बड़े चेहरों तक सीमित नहीं रहेगी बहुजन समाज पार्टी के नेताओं की लाइन में भले ही अनुराधा शर्मा बड़ा चेहरा हो, लेकिन संगठन स्तर पर लालाराम अहिरवार के इर्द-गिर्द ही बुंदेलखंड की राजनीति घूमती है। गठबंधन के दौरान बसपा की ओर से कौन फैसले लेगा या बड़ा सवाल होगा। क्योंकि चुनाव में जो दिखेगा वही सर्वमान्य मना जायेगा ।

इन हालातों में दोनों दलों के बड़े नेताओं के सामने अपनी छवि को बचाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

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