2019 चुनाव का चुनाव क्या मोदी हटाओ, मोदी बचाओ पर जा टिकेगा?

नई दिल्ली 30 दिसम्बरः देश मे राजनैतिक परिस्थितियां जिस तेजी से बदल रही है, उसने 2019 मे होने वाले आम चुनाव के लिये मुददे से ज्यादा मोदी को केन्द्र मे ले लिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह चुनाव इस पृष्ठभूमि के इर्दगिर्द घूमेगा? क्या भाजपा मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा लेकर हिन्दुत्व का कार्ड विकास के उपर थोपे रहेगी?




पिछले दिनो पांच हिन्दी भाषी राज्य मे हुये विधानसभा चुनाव के बाद राजनैतिक हालात करवट लेते नजर आरहे हैं। राजनैतिक हलके मे मोदी की छवि को कमजोर मानने की चर्चा के बीच यह भी कहा जा रहा है कि इससे आम चुनाव मे मोदी फिर से केन्द्र बिन्दु बन रहे हैं।
वर्तमान मे राजनैतिक हालात को अपने अंदर तूफान की तरह दबाये राजनैतिक दल का शीर्षक्रम भी भ्रम की स्थिति को बनाये रखने पर मजबूर हैं। उसे लगता है कि यदि सारे पत्ते अभी खोल दिये गये, तो बीजेपी को फायदा मिल सकता है। यही कारण है कि महागठबंधन से लेकर गैर बीजेपी फ्रंट का मामला पहले आप मे फंसा है।
इस बार यह माना जा रहा है कि हिन्दुत्व बनाम समाजिक न्याय के टकवार के समानान्तर एक और टकराव देखने को मिलेगा। यह होगा मोदी बचाओ, मोदी हटाओ।



इस मुददे के अंदर ही विपक्ष की रणनीति छिपी है। राजनैतिक पंडित मान रहे है कि यदि विपक्ष अभी से एकजुट होकर प्रदर्शन करेगा, तो बीजेपी चुनाव मे इसे सबके चेहरे बेनकाब करने की मुहिम बना सकती है। जबकि अलग, अलग रहने के बाद चुनाव समाप्त होने पर एक होना मतदाताओ को साधे रखने मे कामयाब होगा?
राजनैतिक जानकार यह भी मान रहे है कि यूपी मे बीजेपी के लिये बसपा और सपा मिलकर चुनौती पेश करेगे, इसके पीछे यह तर्क है कि दोनो की अपनी राजनैतिक मजबूरी है। वही कांग्रेस अपने दम पर प्रदर्शन करने की मजबूरी के चलते साथ नहीं आना चाहती। कांग्रेस ने एकला चलो की नीति को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ मे साबित करके भी दिखा दिया। यह बात अलग है कि सपा और बसपा कांग्रेस से विमुख होकर चुनाव लड़े,बाद मे सरकार का अंग बन गये। शायद यही दृश्य आम चुनाव के बाद देखने को मिले। इसमे कांग्रेस को 2019 के चुनाव मे अपनी हैसियत नजर आ जाएगी, तो महागठबंधन भी आकार ले लेगा।

वैसे तो अभी 2019 के चुनाव मे समय है। तब तक परिस्थितियां किस करवट बैठे, यह कहना मुश्किल है। परन्तु अयोध्या मे राम मंदिर का मुददा बीजेपी का सबसे बड़ा हथियार है और मजबूरी भी।

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