बुंदेलखंड के राहुल राय की मेहनत रंग लाई, 5 से हुए 17 विधायक, रिपोर्ट-संदीप

झाँसी-12 दिसंबर मध्य प्रदेश चुनाव में बुंदेलखंड के कांग्रेसी नेताओं को पार्टी ने अलग अलग क्षेत्रों का प्रभार सौंपा था। मंशा साफ थी कि यूपी और और एमपी के नेताओं के जनता से सीधे संवाद के बाद बनने वाली स्थिति का धरातल पर लाभ लिया जा सके । बुंदेलखंड के युवा नेता राहुल राय को ग्वालियर संभाग का प्रभारी बनाया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी चुनावी समर में राहुल राय ने पूरे क्षेत्र में प्रचार की अपनी शैली के जरिए पार्टी को 5 विधायक से 17 विधायक तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जीत के बाद शहर कांग्रेस कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पांच राज्यों में चुनाव नतीजो में से कांग्रेस पार्टी ने तीन राज्यो में जीत दर्ज की जिसमे कांग्रेसियों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाई और खुशियां मनाई।

यह बैठक शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इम्तियाज हुसैन की अध्यक्षता में हुई। बैठक में चर्चा हुई कि अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी ने राहुल राय को जो जिम्मेदारी दी थी उसे उन्होंने बखूबी निभाया, जिसमें सबसे कम उम्र के पर्यवेक्षक ने ग्वालियर के 5 जिलों में से दतिया भिंड मुरैना शिवपुर और ग्वालियर में पर्यवेक्षक के रूप में काम किया और स्थानीय नेताओं को आपसी तालमेल को मिलाने में सफल रहे ।

यही कारण है कि 22 विधानसभाओं में से 17 विधानसभाओं की सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की आपको बता दें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 12 पर्यवेक्षक बनाए थे, जिसमे बुंदेलखंड के नोजवान राहुल राय ग्वालियर संभाग का पर्यवेक्षक बनाया था।

आपको बता दें कि जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश के प्रचार के लिए दतिया मां पीतांबरा पीठ दर्शन करने गए थे और दौरान राहुल राय और कमलनाथ उनके साथ पूजा-अर्चना के समय भी मौजूद रहे थे।
राहुल राय ने प्रचार की रणनीति को बेहद ही सहज तरीके से अंजाम दिया था ।

उनका मकसद साफ था जब तक कार्यकर्ता और नेताओं के बीच तालमेल नहीं होगा, जीत संभव नहीं होगी। यही कारण रहा कि उन्होंने अपने प्रभारी क्षेत्र में स्थानीय नेताओं को वरीयता देते हुए उन्हें प्रचार में आगे रखा और कांग्रेस की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की।

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