गठबंधन- दोस्ती में शंकाएं क्या दूरी पैदा कर रही है

नई दिल्ली 15 जून आगामी लोकसभा चुनाव के पहले राजनीतिक जमीन पर महागठबंधन की तस्वीर बनाने में जुटे विपक्ष के नेताओं के मन में आपसी दोस्ती को लेकर शंकाएं एक दूसरे से दूरियां बना रहे हैं शंकाओं ने हालातों को इस रूप में ला दिया है गठबंधन अमली जामा पहनने से पहले बिखराव की कगार पर खड़ा हो सकता है । खासकर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सपा और बसपा के बीच तालमेल में अभी से दूरियां नजर आ रही हैं।

समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस की करीबी रास नहीं आ रही है? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव में हैं.

अखिलेश ने इफ्तार पार्टी में जाने का किया था ऐलान

बुधवार को अखिलेश यादव ने जोर-शोर से ऐलान किया था कि समाजवादी पार्टी राहुल गांधी की इफ्तार पार्टी में जरूर शामिल होगी, लेकिन शाम को जब इफ्तार पार्टी हुई तो उसमें समाजवादी पार्टी का कोई नुमाइंदा शामिल नहीं हुआ. अमूमन रामगोपाल यादव ऐसे सभी आयोजनों में शिरकत जरूर करते हैं, लेकिन राहुल की इफ्तार पार्टी में वो भी नजर नहीं आए.

 कहां जा रहा है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में हार के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार मानती है जबकि देखा जाए तो यूपी चुनाव के समय कांग्रेस और सपा का गठबंधन राहुल और अखिलेश की दोस्ती दोस्ती के रिश्ते  के रथ पर ऐसे परवान चढ़ा था  , उस समय कसमें खाई थी यह दोस्ती हम नहीं तोडेंगे । अब दोस्ती के लिए अखिलेश इस बात को लेकर संसय  में फंस गए हैं की दोस्त राहुल को देखें या उत्तर प्रदेश में बड़े जनाधार वाले बसपा को । क्योंकि अखिलेश को  उपचुनाव में बसपा से गठबंधन करके जो राजनीतिक सफलता मिली उसने अखिलेश को बसपा के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया है। राजनीतिक गलियारे में यह क्या चीज है कि क्या महागठबंधन की इन नेताओं के मन में उपस्थित रही  शंकाएं महागठबंधन बना पाएंगी?

 

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